शादियों में फिजूलखर्ची
🌹 शादियों पर फिजूलखर्ची- उत्सव बन गया अभिशाप 🌹 भारत में 👫शादियां बड़ी 😊खुशी का अवसर होती है समारोह कभी-कभी कई दिनों तक चलता है और इसकी तैयारी महीनों पहले ही शुरू हो जाती है घर में शादी का जिक्र आते ही सारा 👨👩👧👦परिवार कभी चहकने लगता था ।बूढ़े- जवान -👨🦳बच्चे, सभी शादी में अपने -अपने हिस्से की 😊खुशी ढूंढने लगते थे। 6 महीने पहले ही गेहूं साफ होने लगते थे , दर्जी 2 महीने पहले घर बैठ जाता था ।बहन - बुआ ,महीने भर पहले पिहर बुला ली जाती थी ।15 दिन पहले 💃नाचना -गाना शुरू हो जाता था ।रिश्तेदार -मोहल्ले वाले ,गली को रंगमंच बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे ।एक नितांत पारिवारिक समारोह ।अपनी संस्कृति में रंगा उत्सव। इस समारोह में लाखों और करोड़ों रुपए पानी की तरह बाहाय जाते हैं, हजारों लोगों के खाने का इंतजार किया जाता है अब जब हमारे समाज का या जाति का एक धनी व्यक्ति 5000 व्यक्तियों को शादी में बुला रहा है, तो गए- गुजरे व्यक्ति को दो सौ- पाच सौ तो बुलाने ही पड़ेंगे। दिल्ली के लिए तो मजाक था ,पर चूहे की तो जान...